सभ्यता का संघर्ष और नजरिए का बोध: क्या आप केवल वही देख रहे हैं जो दिखाया जा रहा है?

नमस्ते मित्रों। संभवतः आपने कभी यह मर्मस्पर्शी कहावत सुनी होगी: “यदि घास बोल पाती, तो वह बताती कि ज़ेबरा एक क्रूर राक्षस है और शेर उसका रक्षक” 🤫

प्रथम दृष्टया, यह विचार विरोधाभासी प्रतीत होता है। हमारी सामान्य मानवीय चेतना में शेर एक हिंसक शिकारी है और ज़ेबरा एक निरीह शिकार। लेकिन यदि हम इस संसार को उस घास की आँखों से देखें जो ज़ेबरा द्वारा  खाई जाती है, तो पूरी कहानी का मतलब ही बदल जाता है, सही गलत की परिभाषा ही बदल जाती है।

यह कहावत पूर्णतः ‘व्यक्तिगत दृष्टिकोण’ और ‘परिस्थितिजन्य सत्य’ पर आधारित है। “सही” और “गलत” या “नायक” और “खलनायक” का निर्धारण इस बात से होता है कि आप उस संघर्ष-शृंखला में कहाँ खड़े हैं। हमारे नायक और खलनायक हमारी अपनी जरूरतों और तकलीफों से जन्म लेते हैं। जीवन का सच, उसका सार और व्याकरण हर जीव के लिए उसका अपना है, अलग है।

यदि शेर अपनी बात कह पाता, तो वह तर्क देता कि जीवित रहने के लिए ज़ेबरा का शिकार करना उसकी मजबूरी और उसका प्राकृतिक धर्म है। वह केवल अपना अस्तित्व बचा रहा है। वहीं ज़ेबरा के लिए वही शेर एक खौफनाक कातिल और उसकी दुनिया का सबसे बड़ा विलेन है। लेकिन अब जरा उस घास पर गौर कीजिए जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। अपनी पूरी जिंदगी में वह घास ज़ेबरा द्वारा रौंदी जाती है और खाई जाती है। घास के लिए ज़ेबरा ही वह असली ‘राक्षस’ है जो उसके जीवन को नष्ट कर रहा है। ऐसे में जब शेर आकर ज़ेबरा का शिकार करता है, तो वह अनजाने में ही सही, उस घास को और अधिक बर्बाद होने से बचा लेता है। इसलिए घास की दृष्टि में शेर कोई हत्यारा नहीं, बल्कि एक रक्षक और मसीहा बनकर उभरता है।

यह साधारण सा उदाहरण हमें जीवन और समाज के बारे में एक बहुत बड़ा पाठ पढ़ाता है। इस दुनिया में सत्य कभी भी केवल एक तरफा नहीं होता। अक्सर इतिहास और कहानियाँ वही लोग लिखते या सुनाते हैं जिनके पास ताकत और आवाज होती है, और वे स्वाभाविक रूप से केवल अपना पक्ष और अपना नजरिया ही बताते हैं। उनके लिए जो सही है, जरूरी नहीं कि वह पूरी दुनिया के लिए भी सही हो। वह केवल उनकी अपनी कहानी का एक पहलू है, जबकि उसी कहानी का एक दूसरा और शायद बिल्कुल विपरीत पहलू भी कहीं न कहीं मौजूद होता है। इसीलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले यह समझना अनिवार्य है कि सत्य की परतें बहुत गहरी होती हैं।

आज की दुनिया में चल रहे युद्धों को ही देख लीजिए—चाहे वह मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा नया संघर्ष हो या सालों से खिंचता रूस-यूक्रेन का युद्ध। हर देश, हर नेता अपनी जनता को यही बताता है कि वे ‘रक्षक’ हैं और सामने वाला ‘राक्षस’ है। हर पक्ष के पास अपने तर्क हैं, अपनी मजबूरियाँ हैं और अपना इतिहास है। लेकिन इस भीषण शोर में हम उस ‘घास’ को देखना भूल जाते हैं—वे निर्दोष नागरिक, वे बच्चे और वे परिवार जिनका इन राजनीतिक युद्धों और अपना अपना हित साधने के लिये किए गए युद्धों से कोई लेना-देना नहीं है। उनके लिए रक्षक और भक्षक की परिभाषाएं उन बड़ी बड़ी बातों से बिल्कुल अलग हैं जो टीवी पर सुनाई देते हैं। उनके लिए असली ‘राक्षस’ वह है जो उनकी छत छीन लेता है, और ‘रक्षक’ वह है जो उन्हें शांति की नींद दे दे।

इतिहास की अधूरी गाथाएँ: हम किसका पक्ष सुनने से चूक रहे हैं?

लेख का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि हम अक्सर उस पक्ष को पूरी तरह भूल जाते हैं जो सबसे कमजोर और मौन है। किसी भी विवाद या युद्ध में सबसे धीमी आवाज रखने वाला पक्ष ही अक्सर सबसे बड़ा सच देख रहा होता है। “राक्षस” और “रक्षक” के मुखौटे हमेशा वैसे नहीं होते जैसे वे पहली नजर में दिखाई देते हैं; वे केवल हमारी सुविधा के अनुसार बदलते रहते हैं। असल बुद्धिमानी इस बात में नहीं है कि आप किसकी ऊँची आवाज और प्रोपेगेंडा सुन रहे हैं, बल्कि इस बात में है कि आप किसकी खामोशी और किसके दर्द को समझने का प्रयास कर रहे हैं। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप किसकी गाथा सुन रहे हैं, बल्कि यह है कि आप किस पक्ष को अनसुना कर रहे हैं? क्या आप किसी को ‘विलेन’ या ‘हीरो’ कहने से पहले उस ‘घास’ की भी पुकार सुन रहे हैं जिसने उस परिस्थिति का एक अलग ही चेहरा देखा है? जब तक हम सभी पहलुओं, विशेषकर सबसे उपेक्षित पहलुओं पर विचार नहीं करते, तब तक हमारा न्याय अधूरा और हमारा दृष्टिकोण संकुचित ही रहेगा।

अंत में, मेरी यही कामना है कि ईश्वर आपको वह सूक्ष्म दृष्टि और विशाल हृदय प्रदान करे जो केवल बाहरी शोर को ही नहीं, बल्कि खामोशी के पीछे छिपे गहरे सच को भी सुन और समझ सके। मैं आशा करता हूँ कि आप कभी भी किसी के ‘प्रोपेगेंडा’ का हिस्सा न बनें और दूसरों के द्वारा परोसे गए सच को आँख मूँदकर स्वीकार करने के बजाय, स्वयं के विवेक से सत्य की खोज करें। ईश्वर करे कि आपकी दृष्टि इतनी व्यापक हो कि आप तथाकथित ‘विलेन’ की छिपी हुई मजबूरी और ‘हीरो’ में छिपे स्वार्थ को समय रहते पहचान सकें। आप हमेशा न्याय, सत्य और सनातन के उस पक्ष के साथ अडिग खड़े रहें, जो भले ही आज खामोश हो, पर पूर्णतः सच्चा और शाश्वत है।

मंगल शुभकामनाएं 💐

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