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रविवारीय प्रार्थना: अपने मन और वृत्तियों को पूर्ण नियंत्रण में रखते हुए, नैतिक कर्तव्यबोध से सराबोर रहना; तथा आत्मोन्नति, चित्तशुद्धि और ब्रह्मानुभूति के मार्ग पर अविराम अग्रसर रहना।

आज रविवारीय चिंतन में एक विस्मयकारी बात बताता हूं – हम सब स्वयं से परे जाना चाहते हैं, अपने ‘मैं’, अपने छोटे-मोटे स्वार्थ, डर, अज्ञान और आराम के दायरे से बाहर निकलकर किसी महान उद्देश्य या परम सत्य से जुड़ना चाहते हैं, मौजूदा स्थिति,… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना: अपने मन और वृत्तियों को पूर्ण नियंत्रण में रखते हुए, नैतिक कर्तव्यबोध से सराबोर रहना; तथा आत्मोन्नति, चित्तशुद्धि और ब्रह्मानुभूति के मार्ग पर अविराम अग्रसर रहना।”

I Am Finally Thinking of Stopping to Care for Hearts That Barely Knew Mine Existed…

मैं आज भी सोचता हूँ कि कहीं मेरी कोई बात किसी को चुभ न जाए, फिर ख़याल आता है— जब मेरा दिल दुखा था, तब किसी ने पूछा था क्या? यहाँ सब अपनी सफ़ाई, अपने बहाने देकर आगे बढ़ गए, किसी ने अपने कहे… Continue Reading “I Am Finally Thinking of Stopping to Care for Hearts That Barely Knew Mine Existed…”

रविवारीय प्रार्थना – दिखावे की भक्ति और बिखरते विश्वास के इस दौर में श्री रामायण – गीता के सत्य को हमारे विचारों, शब्दों और कर्मों का असल में मार्गदर्शक-दर्पण बनाना प्रार्थना है।

हममें से अधिकांश लोग अपनी पूरी ज़िंदगी ईश्वर से सिर्फ एक ही गुहार लगाने में बिता देते हैं—”हे ईश्वर! मेरे हालात बदल दो, मेरा भाग्य बदल दो, मुझे यह दिला दो या वह बना दो।” लेकिन मुझे लगता  है कि शायद, ईश्वर मौन रहकर… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – दिखावे की भक्ति और बिखरते विश्वास के इस दौर में श्री रामायण – गीता के सत्य को हमारे विचारों, शब्दों और कर्मों का असल में मार्गदर्शक-दर्पण बनाना प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – ‘कुछ होने’ और ‘कुछ पाने’ की इस अंतहीन ‘हाय-हाय’ को समाप्त कर, अपने अशांत चित्त को शांत करना और ‘सुकून, संतोष और शून्यता’ की ओर मुड़ जाना ही प्रार्थना है।

अगर आज मैं आपको बिल्कुल साफ़ शब्दों में बताऊँ—कि दुनिया क्या सोचती है और आपके आस-पास के लोग क्या कहते हैं, अगर उस शोर को एक पल के लिए छोड़ दिया जा—तो वास्तविक आध्यात्मिकता संसार में कुछ भी बटोरने या पा लेने की दौड़… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – ‘कुछ होने’ और ‘कुछ पाने’ की इस अंतहीन ‘हाय-हाय’ को समाप्त कर, अपने अशांत चित्त को शांत करना और ‘सुकून, संतोष और शून्यता’ की ओर मुड़ जाना ही प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – अपने ब्रह्म स्वरूप को अपने रोजमर्रा के कार्यों में, बातचीत और आचरण में आगे रखना न कि अपने आदिम, शिकारी और बेचैन हिस्से को।

आज के जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह नहीं है कि हममें ज्ञान की कमी है। हमारी असली समस्या अज्ञानता नहीं, बल्कि क्रियान्वयन (execution) की है। ऐसा शायद ही कभी होता है जब हमें यह न पता हो कि सही क्या है; असली चुनौती… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – अपने ब्रह्म स्वरूप को अपने रोजमर्रा के कार्यों में, बातचीत और आचरण में आगे रखना न कि अपने आदिम, शिकारी और बेचैन हिस्से को।”

रविवारीय प्रार्थना: जब छल-कपट, क्षुद्रता और अनैतिकता दुनियादारी का हिस्सा बन चुकी हों, तब अपने आचरण की पवित्रता को बनाए रखना और सनातन सिद्धांतों पर अडिग रहना ही सच्ची प्रार्थना है।

हर सुबह जब हम आँखें खोलते हैं, तो सफलता की एक बंधी-बंधाई परिभाषा हमारे सामने आ खड़ी होती है — एक खुशहाल परिवार, समाज में रुतबा, करियर की नई ऊंचाई, अच्छा स्वास्थ्य और चारों तरफ वाहवाही। बेशक, ये सभी जीवन के अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना: जब छल-कपट, क्षुद्रता और अनैतिकता दुनियादारी का हिस्सा बन चुकी हों, तब अपने आचरण की पवित्रता को बनाए रखना और सनातन सिद्धांतों पर अडिग रहना ही सच्ची प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – बिना सोचे-विचारे अपने स्तर से नीचे गिर कर बेहोशी में कुछ भी कहने या कर गुजरने से बचना, ज्यादातर होश में रहना तथा अपने मूल दिव्य भाव में स्थिर रहना ही प्रार्थना है।

आज फिर रविवार है, चिंतन-मनन करने का दिन, थोड़ा ठहरकर अंतर्मन में झांकने का दिन। आज मैं आपके साथ जो विचार साझा कर रहा हूँ, वह न तो बहुत जटिल है और न ही इसे करने में कोई बड़ा प्रयास चाहिए। आज मैं आपसे… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – बिना सोचे-विचारे अपने स्तर से नीचे गिर कर बेहोशी में कुछ भी कहने या कर गुजरने से बचना, ज्यादातर होश में रहना तथा अपने मूल दिव्य भाव में स्थिर रहना ही प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – आप पैदायशी दुष्ट या रूखे या मूर्ख या उदासीन इंसान नहीं है, बस आपके भीतर धूल जम गई है, कूड़ा करकट का पहाड़ और पूर्वाग्रहों की दीवारें बन गई है, उन्हें मिटाने और हटाने का प्रयास ही प्रार्थना है।

मुझे आपका तो पता नहीं, लेकिन इस संसार में ज्यादातर लोग खुद को सुधारने, श्रेष्ठ बनने, उस परम ईश्वरीय अनुभूति को और जीवन की समस्त श्रेष्ठ संभावनाओं को साकार करने की कोशिश में लगे हैं। आप अपना समय और ऊर्जा किस चीज़ में लगा… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – आप पैदायशी दुष्ट या रूखे या मूर्ख या उदासीन इंसान नहीं है, बस आपके भीतर धूल जम गई है, कूड़ा करकट का पहाड़ और पूर्वाग्रहों की दीवारें बन गई है, उन्हें मिटाने और हटाने का प्रयास ही प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – परमात्मा से कुछ भी नहीं छुपा है न तो आपके कर्म और न ही उसके पीछे की वजह या नीयत। इस सत्य के प्रति निरंतर सावधान रहना ही प्रार्थना है।

रविवार की इस शांत और खूबसूरत सुबह, चलिए आज फिर चिंतन करते हैं – सब कुछ करने के बाद, हर भटकाव के बाद, हर नाटकबाजी के बाद, झूठ सच के बाद, सत्य को समझने और वापस अपने ही भीतर मौजूद उस ईश्वर के पास… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – परमात्मा से कुछ भी नहीं छुपा है न तो आपके कर्म और न ही उसके पीछे की वजह या नीयत। इस सत्य के प्रति निरंतर सावधान रहना ही प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – स्वय को श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ की और बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत रखना।

आज फिर रविवार है—एक ऐसा दिन जो किसी पुरानी गाँठ को खोलने, किसी नए सत्य को आत्मसात करने और स्वयं को जगाने के लिए मिला है। यह समय है अपनी ‘ग्रहणशीलता’ को परखने का और ईश्वर की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए अपनी… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – स्वय को श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ की और बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत रखना।”