Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
हममें से अधिकांश लोग अपनी पूरी ज़िंदगी ईश्वर से सिर्फ एक ही गुहार लगाने में बिता देते हैं—”हे ईश्वर! मेरे हालात बदल दो, मेरा भाग्य बदल दो, मुझे यह दिला दो या वह बना दो।” लेकिन मुझे लगता है कि शायद, ईश्वर मौन रहकर हमारी उस एक सच्ची प्रार्थना का इंतज़ार करते हैं, जिसमें हम कहें कि “हे प्रभु, बाहरी हालात नहीं, बल्कि मेरा भीतर बदल दो; मेरा दिल और मेरा दिमाग बदल दो।”
मैं यह इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि भाग्यवश हमें पहले से ही बहुत कुछ प्राप्त है, और आगे भी हमारी मेहनत और अच्छे कर्मों के प्रतिफल के रूप में सब कुछ मिल ही जाएगा। इस संसार का नियम यही है। लेकिन आज इस रविवारीय लेख के माध्यम से, मैं बाहरी उपलब्धियों की नहीं, बल्कि एक गहरे आंतरिक सत्य की बात कर रहा हूँ—कि आखिर ईश्वर हमारी इन तमाम प्रार्थनाओं में हमसे क्या चाहते हैं? वे उनके सामने झुके हुए सिरों में क्या ढूँढते हैं?
मुझे पूरा यक़ीन है कि भगवान को हमारा ऐसा दिल नहीं चाहिए जो सिर्फ सुबह-शाम की दस मिनट की पूजा या मंदिर की चौखट छूने तक पवित्र रहता है। वे तो एक ऐसा अंतःकरण चाहते हैं जहाँ चौबीसों घंटे उनकी उपस्थिति हो। वे एक ऐसा मन चाहते हैं जिसके हर विचार में परमात्मा की गूंज हो, हर साधारण से काम में उनकी असाधारण छवि दिखे, बोलचाल में उनका प्रेम झलके, और पूरा आचरण उनके सिद्धांतों का जीवंत दर्पण बन जाए। अगर हमारा रोजमर्रा का जीवन उनके मूल्यों को नहीं दर्शाता, तो हमारी प्रार्थनाएँ महज़ एक ढोंग बनकर रह जाती हैं।
वास्तव में, सौभाग्य से हमें जो बुद्धि, शक्ति और संसाधन मिले हैं, उनका सही उपयोग परमात्मा के बताए मार्ग पर चलने के लिये होना चाहिए, उच्चतर आध्यात्मिक लक्ष्यों कि प्राप्ति के लिए होना चाहिय न कि पाप, कल्मष, विकार और आसक्ति को बढ़ाने में। क्या करना ठीक है और क्या गलत – यदि कोई इस फर्क से अनजान है, तो बात अलग है; लेकिन यदि आप सत्य को जानते हैं, यदि आपको हमारे धार्मिक ग्रंथों और आध्यात्मिक बातों की थोड़ी-बहुत भी समझ है और फिर भी आप कोई निच और अधार्मिक कार्य कर रहे हैं तो संभल जाइए। जानते हुए भी गलत काम करना या गलत राह पर चल कर उसके परिणाम से बचा नहीं जा सकता है। हो सकता है कि पिछले जन्मों के किसी अच्छे प्रारब्ध के कारण आप इस बार बच भी जाएं, लेकिन कब तक? और अगले-पिछले को छोड़ भी दें, तो सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि हम भीतर से खोखले होने लगते हैं। परमात्मा की उस दिव्य ऊर्जा से हम रिक्त होते चले जाते हैं—चाहे इसका अहसास हमें आज हो या वक्त गुज़रने के बाद।
हमें अच्छी तरह पता है कि किस बात से किसी का दिल दुखता है, कहाँ हम बेईमानी या चोरी या धोखा धड़ी कर रहे हैं और कहाँ हम सही हैं। असली संकट तब खड़ा होता है जब हम गीता या रामायण के श्लोकों और चौपाइयों को सोशल मीडिया पर स्टेटस लगाने या दूसरों को उपदेश देने के लिए तो इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जब खुद के आचरण की बारी आती है, तो हम मुँह फेर लेते हैं।
आज मेरे आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना है कि आपका हृदय ऐसा बन जाए जहाँ अहंकार के लिए कोई कोना न हो, जहाँ कड़वाहट टिक न सके और जहाँ नैतिक मूल्यों से कोई समझौता न हो। श्री मद्भागवद् गीता और श्री रामचरितमानस (रामायण) में निहित जो ईश्वरीय वचन और सीख हैं, वे महज़ किताबों में बंद न रहें, बल्कि वे हर पल आपके विचारों, शब्दों और आपके फ़सलों और कर्मों का मार्गदर्शन करें जिससे कि आपके इस जीवन की सर्वश्रेष्ठ सम्भावनाएँ धूमिल न होने पाये।
आपको जीवन के सभी उच्च लक्ष्य, आत्मिक पूर्णता और परम संतोष शीघ्र प्राप्त हो। आपका हृदय सदा स्वस्थ, मस्त, प्रफुल्लित और प्रेममय रहे। आपका अंतःकरण परमात्मा के प्रति गहरे अहोभाव और कृतज्ञता से भरा रहे और आप अपने चित्त को शुद्ध व स्थिर करने के लिए निरंतर आत्म-अवलोकन करते रहें। इन्हीं पवित्र और मंगल शुभकामनाओं के साथ, आपको सप्रेम नमस्कार 🙏
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः
