Category: काव्य, साहित्य, शायरी, ग़ज़ल

कृष्ण जन्माष्टमी

रविवारीय प्रार्थना – ये याद रखना कि कोई भी इंसान इस दुनिया में कभी खाली हाथ नहीं आता, वह अपने प्रारब्ध के साथ आता है और अपने कर्मों की विरासत छोड़कर जाता है प्रार्थना है।

मैं आज एक बात स्पष्ट कर दूं कि ज्यादातर रविवारीय लेख केवल आपके लिए नहीं होते हैं; ये तो बस मेरी एक छोटी सी कोशिश होती है, अपने जीवन, परमात्मा और अध्यात्म को अपनी समझ से समझने की। और हाँ, ये उन आने वाली… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – ये याद रखना कि कोई भी इंसान इस दुनिया में कभी खाली हाथ नहीं आता, वह अपने प्रारब्ध के साथ आता है और अपने कर्मों की विरासत छोड़कर जाता है प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – क्या आपका अस्तित्व और चेतना वास्तव में स्वतंत्र है या पुरानी धारणाओं, कुरीतियों, आदतों और संकीर्ण प्रवृत्तियों नें आज भी उसे गुलाम बना रखा है।

आज का ये रविवारीय लेख उन साधकों को समर्पित है, जो जीवन के गहरे रहस्यों को भेदकर सच्ची आध्यात्मिक स्वाधीनता पाना चाहते हैं, तथा आनंद, परम शांति और मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होने की अभिलाषा रखते हैं। कल हमने पूरे गौरव के साथ… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – क्या आपका अस्तित्व और चेतना वास्तव में स्वतंत्र है या पुरानी धारणाओं, कुरीतियों, आदतों और संकीर्ण प्रवृत्तियों नें आज भी उसे गुलाम बना रखा है।”

I Am Finally Thinking of Stopping to Care for Hearts That Barely Knew Mine Existed…

मैं आज भी सोचता हूँ कि कहीं मेरी कोई बात किसी को चुभ न जाए, फिर ख़याल आता है— जब मेरा दिल दुखा था, तब किसी ने पूछा था क्या? यहाँ सब अपनी सफ़ाई, अपने बहाने देकर आगे बढ़ गए, किसी ने अपने कहे… Continue Reading “I Am Finally Thinking of Stopping to Care for Hearts That Barely Knew Mine Existed…”