Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
मैं आज एक बात स्पष्ट कर दूं कि ज्यादातर रविवारीय लेख केवल आपके लिए नहीं होते हैं; ये तो बस मेरी एक छोटी सी कोशिश होती है, अपने जीवन, परमात्मा और अध्यात्म को अपनी समझ से समझने की। और हाँ, ये उन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी होते हैं जिनके पास बहुत कुछ पढ़ने या समझने का समय नही होगा। आपने तो सब महान ग्रँथ अवश्य पढ़ रखे होंगे… पढ़े हैं ना? 🤭🤭 बस यूँ ही पूछ लिया, क्योंकि मुझे पता है कि आपके पास तो समय की कभी कोई कमी रही नहीं, है ना 🤭🤪??
आज का ये रविवारीय लेख ये याद दिलाने के लिये है कि कोई भी इंसान इस दुनिया में कभी खाली हाथ नहीं आता, वह अपने प्रारब्ध (आपके ही पूर्वकर्मों का वो भाग जो वर्तमान जन्म में फल देने के लिए उपस्थित है) के साथ आता है और अपने कर्मों की विरासत छोड़कर जाता है।
जब यह सनातन सच समझ में आ जाता है, तो जीवन की दिशा अपने आप बदलने लगती है। हमारे कर्म और प्रार्थनाएं तो बदलती ही बदलती हैं, साथ ही हमारे मन में एक ऐसी समझ पैदा होती है जो हमारे सोचने और जीने के तरीके को तो पूरी तरह बदल ही देती है – बल्कि हमारी आध्यात्मिक यात्रा भी शुरू करवा देती है।
हमारे कर्म अच्छे होने लगते हैं, क्योंकि यह बात साफ़ हो जाती है कि हम जो भी अच्छा या बुरा करेंगे, उसका फल केवल हमें ही नहीं बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी भुगतना पड़ेगा। हमारी प्रार्थनाएं भी बदल जाती हैं—वे केवल हालात को अपने हिसाब से बदलने की ज़िद नहीं रह जातीं, बल्कि हर परिस्थिति में ईश्वर की मर्जी को समझने और उसे शांति से स्वीकार करने का साधन बन जाती हैं। जीवन में आभार और समर्पण का भाव आ जाता है और बढ़ने लगता है।
इसलिए आज से हर घटना को उनके मंगलमय विधान के रूप में स्वीकारना ही हमारी प्रार्थना बन जाए तो मजा आ जाए। आज से प्रार्थना करिए कि अपना कर्मफल और उनकी लीला को सहर्ष स्वीकार करने का विवेक, धैर्य और सामर्थ्य प्राप्त हो जाए। यही भाव शायद हमारी प्रार्थना को साधारण याचना (अपनी तुच्छ इच्छाओं को पूर्ण करने का आग्रह) को उठाकर आध्यात्मिक साधना बना देगा।
आज मेरी आराध्य प्रभु जी से विनती है कि उनकी कृपा से आपको उनकी लीला में अपना सर्वश्रेष्ठ देना और करना आ जाये बगैर रोये-पिटे, बगैर किसी ‘किंतु-परंतु’ या “शर्त” के तथा आपकी आपकी असत्य से सत्य, अज्ञान से ज्ञान और नश्वरता से अमृतस्वरूप की अनुभूति की आध्यात्मिक यात्रा आरंभ हो जाए।
आप स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें और आपका जीवन एक सुखद आध्यात्मिक यात्रा की तरह आगे बढ़े—इन्हीं शुभकामनाओं के साथ सप्रेम नमस्कार 🙏
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।
