Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
आज इस रविवारीय लेख में मैं किसी जटिल मंत्र, वेद पुराणों में लिखी विधियों, दिनचर्या, बंधनों या किसी अदृश्य ‘हायर सेल्फ़’ की भारी-भरकम बातें नहीं करूँगा। आज इस बात की पड़ताल करेंगे कि आपको वास्तव में अच्छा कैसे महसूस होता है? आप भीतर से खुश कैसे होते हैं? और वह सब कैसे हासिल कर सकते हैं जिसके आप हकदार हैं और जो आपके जीवन की पूर्णता के लिए ज़रूरी है? बस इतना ही।
हम में से हर इंसान अलग है, हर किसी के सोचने और जीने का ढंग जुदा है। लेकिन दुनिया के किसी भी कोने में बैठा कोई भी व्यक्ति क्यों न हो, एक चाहत सबकी साझी है—हर कोई बेहतर दिखना चाहता है बनना चाहता है, बीते हुए कल से ज़्यादा शांत, समृद्ध, सामर्थ्यवान, बुद्धिमान और आनंदमय बनना चाहता है। हर कोई अपने परलोक को संवारना चाहता है। आप भी जरूर चाहते होंगे 🤫?
मेरी समझ से आपको वही रास्ता चुनना चाहिए जो आपको इन सब तक पहुँचाए, बाकी सब व्यर्थ है। अगर अपने मंदिर में बैठ कर प्रार्थना करने से आपको सहारा मिलता है, मन को सुकून मिलता है तो पूरे दिल से प्रार्थना कीजिए। अगर लिखकर, पढ़कर, खा – पी कर, गा कर, नाचकर, या यहाँ तक कि कभी उल्टा लटक कर, गलियां बक कर, रोकर, दिल का गुबार निकालकर और शिकायतें कर के आपको भीतर से हल्का और अच्छा महसूस होता है, तो वही कीजिए। बस अपनी नज़र इस एक मूल मक़सद पर साफ़ रखिए कि आपको इस जीवन में क्या पाना है, और क्या बनना है।
दूसरी महत्वपूर्ण बात आज ये है कि सब कुछ पहले से तय है या नहीं, इसका कोई प्रमाण न तो मेरे पास है और न ही किसी दूसरे के पास। लेकिन साधारण सी लॉजिकल बुद्धि यही कहती है कि आप आज क्या करते हैं, क्या नहीं करते हैं, कैसा सोचते हैं, क्या कहते हैं क्या नहीं और आपका आचार-व्यवहार कैसा है—यही सब आपके आने वाले कल की नींव रखता है। यह मानकर चलना कि आपके हर फ़ैसले का एक गहरा असर होता है, इसमें आपका कुछ खर्च नहीं होता; लेकिन यह मानकर हाथ पर हाथ धरे बैठ जाना कि ‘कुछ भी हमारे हाथ में नहीं’, आप माने या न माने आपकी इस मनुष्य जीवन की सभी संभावनाओं को पूरी तरह से नष्ट कर सकता है।
इसलिए आज के लिए बस इतना ही कि समय रहते अपने जीवन में वे सब ज़रूरी बदलाव ले आइए, जिससे आपको वह सब श्रेष्ठ मिल सके जिसके आप हक़दार हैं, और बेहतर होने का कोई भी मौका हाथ से न निकलने पाए। वास्तव में, हर रोज़ अपनी निम्नता को उच्चता में ढालने का निरंतर प्रयास ही सबसे सच्ची प्रार्थना है।
आज मैं अपने आराध्य प्रभु जी से प्रार्थना करता हूँ कि आप वह सब शीघ्र प्राप्त करें और वो बन सकें, जिसके लिए आप निरंतर कड़ा श्रम, पुरुषार्थ और दिन रात पूजा-पाठ कर रहे हैं।
आपके उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामनाओं के साथ, मैं प्रभु से यह विनती करता हूँ कि आपका जीवन आपके अपनों के लिए आनंद का कारण बने और आप ईश्वर के असीम प्रेम व अनुग्रह के सच्चे पात्र बनते चले जाएँ।
आपका ये दिन बेहद शुभ, मंगलमय, शांत और नवचेतना से भरा हो।
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।
