रविवारीय प्रार्थना – रावण की उस बेचैन ‘अपूर्णता’ से राम की सहज ‘पूर्णता’ तक की यात्रा।

आज रविवार को मैं दुबारा उन साधारण सी बातों को आपसे साझा कर रहा हूँ जिन्हें समझना साधारण लग सकता है, लेकिन जीना जीवन बदल देने वाला है। अभी रामनवमी का पावन पर्व बीता है और बधाई संदेशों के शोर के बीच एक बात समझ आई कि जब हम ‘श्री राम जैसी चेतना’ की बात करते हैं, तो हम किसी ऐतिहासिक पात्र मात्र की बात नहीं कर रहे, बल्कि चेतना की उस ऊँचाई की बात कर रहे हैं जिसे छूना हर इंसान का परम लक्ष्य होना चाहिए।

असल में, राम और रावण दो व्यक्तियों के नाम नहीं, बल्कि दो विपरीत आयाम हैं, चेतनाएं हैं, मानसिकताऐं हैं, जीवन जीने के दो ढंग हैं। राम जैसी चेतना का अर्थ है— हर पल अपनी पूर्णता में जीना।। राम को अयोध्या की गद्दी मिले या चौदह वर्ष का वनवास, उनके भीतर का ‘महल’ कभी नहीं गिरता। वह जहाँ पैर रख दें, वहीं स्वर्ग खड़ा हो जाता है। इसके उलट, रावण जैसी चेतना हमेशा एक ‘अधूरेपन’ और ‘भूख’ में जीती है। उसे लगता है कि उसकी खुशी कहीं बाहर है—किसी और की संपत्ति में, किसी और की प्रतिष्ठा में, जिसे छीनकर या जीतकर लाना है। यही वजह है कि सोने की लंका का स्वामी होकर भी रावण भीतर से दरिद्र और बेचैन रहता है, जबकि राम वनवास की प्रतिकूलताओं में भी एक सम्राट की तरह शांत और अडिग रहते हैं।

सत्य तो यह है कि परमात्मा कहीं सुदूर लोक से उतरकर नहीं आता। जब हमारे भीतर का कोलाहल, यह अधूरापन, रावण रूपी अहंकार और यह ऊंचा दिखने और नीचा दिखाने की तड़प—पूरी तरह शांत हो जाती है, तब जो बच जाता है, वही परमात्मा है, वही राम है। यही वह बिंदु है जहाँ से सच्ची दिव्यता, आध्यात्मिकता और धार्मिकता आपके जीवन में प्रवेश करती है। इसीलिए मेरे अनुसार हमारी सर्वोच्च प्रार्थना है – हमारे विचारों और कार्यों का, सोच का राम रूपी हो जाना जो बेचैनी और तनाव के बजाय आपके और आपके अपने के लिए ‘आनंद का ईंधन’ बने।

आज मेरे आराध्य प्रभु जी से विनती है कि आपको अपने भीतर जल्द ही शांति, संतोष, सहजता और राम रूपी पूर्णता का अनुभव होने लगे और आपके मन की वे सभी रावण रूपी विकृतियाँ, वे डर और वे अधूरेपन की भावनाएँ सदा के लिए समाप्त हो जाएं जो आपको चैन से बैठने नहीं देतीं।

आपका आज का रविवार पूर्णता, आत्म-बोध, असीम तृप्ति, प्रसन्नता और मेरी इन मंगल शुभकामनाओं से महकता रहे💐

श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।

Leave a comment