रविवारीय प्रार्थना – स्वय को श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ की और बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत रखना।

आज फिर रविवार है—एक ऐसा दिन जो किसी पुरानी गाँठ को खोलने, किसी नए सत्य को आत्मसात करने और स्वयं को जगाने के लिए मिला है। यह समय है अपनी ‘ग्रहणशीलता’ को परखने का और ईश्वर की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए अपनी ‘पात्रता’ को विस्तार देने का।

आज ये बात स्वयं को याद कराने का दिन है कि आप आज जो कुछ भी हैं, वह आपकी सोच और आपके कर्मों का कुल योग है। आप अपनी दिनचर्या में जो कर रहे हैं या जो करने से बच रहे हैं, सफलता या असफलता उसी का अंतिम परिणाम है कोई और इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

इसीलिए स्वय को श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ की और बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत रखना, अपने भीतर की अच्छाई को हर परिस्थिति में जिंदा रखना तथा अपने परिवार एवं शुभ चिंतकों के प्रति स्नेह, आदर एवं सद्भाव की भावना को बनाये रखना ही प्रार्थना है।

आपके व्यवहार, विचार और कार्यों से आपके आराध्य प्रसन्न हों, आप स्वस्थ रहें तथा आपका मन लगातार उल्लास-उत्साह से भरा रहे, ऐसी मेरी आज मेरे आराध्य प्रभु जी से विनती है। मंगल शुभकामनाएं 💐💐

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