Manifestation • Mindset • Abundance • Blessings Your future self has brought you here. Time to Align, Attract & Evolve, Now🦸
मुझे आपका तो पता नहीं, लेकिन इस संसार में ज्यादातर लोग खुद को सुधारने, श्रेष्ठ बनने, उस परम ईश्वरीय अनुभूति को और जीवन की समस्त श्रेष्ठ संभावनाओं को साकार करने की कोशिश में लगे हैं। आप अपना समय और ऊर्जा किस चीज़ में लगा रहे हैं, यह आप ही जानें 🤔😂🤣।
आज इस रविवारीय लेख के माध्यम से, मैं आपको स्वयं के परीक्षण, अवलोकन और गहरे चिंतन-मनन का न्योता देता हूँ। एक ऐसा प्रयास करने का निवदेन करता हूँ, जिससे आपकी दिव्य आत्मा पर जमा हो चुकी बाहरी धूल साफ़ हो सके। खुद को यह याद दिलाने की विनती करता हूँ कि आपके जीवन और इस संसार में जो कुछ भी बुरा या गलत घटित हो रहा है, वह किसी बाहरी शैतानी शक्ति की वजह से नहीं है; बल्कि वह केवल आपके अपने मन की बेचैनी, उसके भटकाव और आपके ही कर्मों की गूँज है।
इसी बोध के साथ, एक गहरी साँस लें, हाथ दिल पर रखें और खुद को भरोसा दिलाएं कि आपकी आत्मा, आपका मूल दूषित नहीं हुआ है। आप पैदायशी दुष्ट या रूखे या मूर्ख या उदासीन नहीं है, बस आपके भीतर धूल जम गई है, कूड़ा करकट का पहाड़ और पूर्वाग्रह की दीवारें बन गई है। बस आज उस धूल को, जमा हो गए कुड़े करकट को और पूर्वाग्रह या अन्य की वजह से स्वयं पर लादे बोझ को खुद से अलग करना है – जिसे आपको कभी ढोना ही नहीं था। आपको उस पुराने गुस्से, अपराधबोध, अड़ियल अहंकार, पूर्वाग्रहों से ग्रसित मानसिकता और खुद को सही साबित करने की उस व्यर्थ ज़िद को विसर्जित करना है – जिसे आपने भूलवश अपना मूल स्वभाव मान लिया है। आपको अपने उस पुराने, डरे हुए रूप को भी अलविदा कहना है जो सोचता है कि इन पुराने दुष्चक्रों में फँसे रहना ही उसकी मजबूरी है, और जो ये मानने लगा है कि पूर्ण रूप से श्रेष्ठ, पवित्र और शुद्ध होना एवं आत्मबोध और ईश्वरीय ऊर्जा की अनुभूति होना अब मुमकिन नहीं है।
इसीलिये प्रतिदिन अपने व्यस्त समय से कुछ पल निकालना – किसी ग्रंथ के डर से नहीं, किसी नियम के दबाव में नहीं—बल्कि अपने सर्वश्रेष्ठ की ओर बढ़ने की दिशा में प्रयासरत रखने के लिए, अपने भीतर के दिव्यांश को हर परिस्थिति में जिंदा रखने के लिये तथा अपनी भगवद्व अनुभूति के लिए जरूरी पात्रता के विकास के लिये प्रार्थना है। सच तो यही है कि जब तक हम पुरानी सड़न गलन को अपनी रगों में पालते रहेंगे, तब तक हमारे भीतर किसी नई सुबह की शुरुआत हो ही नहीं सकती। अगर हमें एक नया जीवन जीना है, तो अतीत के मलबे को हर दिन अपने हाथों से साफ़ करना ही होगा। यही समझ और प्रयास प्रार्थना है।
मैं आज अपने आराध्य प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि उनकी कृपा से आपका सोया हुआ चैतन्य जल्द ही जाग्रत हो जाए, जिससे आप अपनी उस सारी ऊर्जा को वापस समेट सकें जो न जाने कब से अलग-अलग दिशाओं में बिखरी पड़ी है। जिससे कि आप अपने उस आत्मबल, आत्मसम्मान और आंतरिक सुकून को उन बंधनों से भी आज़ाद करा पायें, जो दम तोड़ चुके रिश्तों के मलबे में, डर के मारे लिए गए पुराने फ़ैसलों में और भीतर से निचोड़ने वाले अनचाहे समझौतों में फँसे पड़े हैं।
आप सुखी रहें, रोगमुक्त रहें, प्रतिदिन मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें तथा कभी किसी दुःख का भागी न बनना पड़े, इन्हीं अब मंगलकामनाओं के साथ आपको सप्रेम नमस्कार 🙏
श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।।
