प्रार्थना

केवल अप्राप्त को प्राप्त करना ही नही, बल्कि जो मिला है, प्राप्त है, मौजूद है या फिर जो भी जीवन यात्रा में प्राप्त होता जाये, मिलता जाये – उसके साथ और उसका उत्सव मनाना, नृत्य करना, गीत गाना और धन्यवाद देना ही बस जीवन है, सफलता है, प्रार्थना है। पूरी मस्ती से आज में जीना ही हमारी प्रार्थना है, प्रभु के असीमित आशीर्वाद, अनुग्रह और कृपा के प्रति आदर है और कृतज्ञता व्यक्त करना है।

केवल जीना नही हैं, घिसटना नही है, या केवल उस तरह नही चलना है जैसे आपको आपका डर, लद्धड़पन, जड़ता या मूढ़ता चलाये, बल्कि वैसे चलना है जैसे आपको आपका प्रेम, विश्वास और श्रद्धा चलाये और उस तरह चलना है जिस तरह आशा, ख़ुशी और संतोष आपको चलाये।

और जैसे की मैं हर बार कहता हूं – प्रत्येक जीव परमात्मा को अपने भीतर ही लिए बैठा है, असीमित सम्भावनायें, क्षमतायें और योग्यतायें लिये बैठा है, बस थोड़े से पत्थर छांटने हैं, छैनी उठानी है और अपने को तराशना है, पूरी तरह से उड़ेल देना है, उजागर और प्रकट कर देना है, बस यही प्रयास प्रार्थना है।

याद रखें – मन्दिर में घण्टनाद और धूप के धुँए की ही भांति जब ये नाद और सुगंधित धुंआ आपके भीतर से उठेगा, पवित्र ज्योत की तरह आप भीतर से प्रज्वलित होंगे, जब आप स्वयं को आशा, होंसले, उत्साह, उमंग और उल्लास से भर लेंगे, तब जाकर आपके भीतर सोई हुई दिव्यता, शक्तियां और असल सामर्थ्य जागेगा, तब ही कुछ शुभ होगा, असल सफलता का अंकुर फूटेगा, सब मनोवांछित इच्छायें और प्रार्थनायें फलित होंगी।

सब कामनाओं को पूर्ण करने वाले मेरे आराध्य प्रभु से आज प्रार्थना है कि आपकी सूझ-बूझ हमेशा बनी रहे, आप हष्ट-पुष्ट और स्वस्थ बने रहें, शतायु हों, आनंदित रहें, प्रयासरत रहें और सदैव उन्नति करते रहें। मंगल शुभकामनाएं। 💐💐

Lord Hanuman ji, New Delhi

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