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रविवारीय प्रार्थना – अपनी भूलों और गलतियों के प्रति जागरूक रहना, अपने भीतर को परिष्कृत और अपने ‘मैं’ को खत्म करने का निरंतर प्रयास करना तथा उनका नामजप करना।

रविवार की शांत सुबह मेरे लिये आत्म-चिंतन का निमंत्रण  होती है। यह वह समय है जब मैं उन अनुभूतियों को – बातों को समझने और शब्द देने की कोशिश करता हूँ, जो किसी अदृश्य ऊर्जा, पितरों, गुरु-सत्ता या उस ‘बोधिसत्व चेतना’ की प्रेरणा से… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – अपनी भूलों और गलतियों के प्रति जागरूक रहना, अपने भीतर को परिष्कृत और अपने ‘मैं’ को खत्म करने का निरंतर प्रयास करना तथा उनका नामजप करना।”

रविवारीय प्रार्थना – वर्तमान में सहजता से जीना और कल से बेहतर होना और करना।

हर रविवार की सुबह, मैं पुरानी पीढ़ियों के ज्ञान की उस पोटली को खोलता हूँ, जिसे उन्होंने जीवन भर की खोज से इकट्ठा किया था। मेरा प्रयास यही रहता है कि उस ज्ञान को आप तक इतनी सरलता और सहजता से पहुँचा सकूँ कि… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – वर्तमान में सहजता से जीना और कल से बेहतर होना और करना।”