राम जैसा नाम और प्रतिष्ठा पर रावण जैसी सोच तथा जीवनशैली।

जब लोग ये मानने लगें हैं कि समस्त धर्मों ने आदमी का शोषण किया है, तो मैं ये बता दूँ कि हमारे धर्म ने, शास्त्रों ने और किसी भी अवतार ने हमे पापी नहीं कहा है। उन्होंने तो सभी को ब्रह्म—स्वरूप माना है। वेद, पुराणों और उपनिषदों ने कहा है कि हम सबके भीतर वही छिपा है जो सर्वव्यापक है। आप को खालिस सोना बताया है। फिर किस बात की चिन्ता, दुःख और डर?

लेकिन आपके भ्रम, डर, चिंता या बहुत सारी उलझनों का मूल कारण शायद ये है कि आप प्रतिफल, नाम और प्रतिष्ठा तो भगवान राम जैसी चाहते हैं लेकिन अपने कार्य, व्यवहार, स्वभाव, अपनी सोच तथा जीवनशैली को रावण जैसी बनाये रखते हैं। बस यही झगड़े की जड़ है। उम्मीद है आप समझ रहे होंगे।

प्रार्थना अपने मन, कर्म और चिंतन में अपने प्राकृत ईश्वरीय अस्तित्व को महसूस तथा धारण करना है। जो दिव्यता, अनन्तता एवं सामर्थ्य आप में पहले से मौजूद है उसकि अपने लोभ, मोह और अहंकार रूपी भेड़ियों से निरंतर रक्षा करना ही सच्ची प्रार्थना है।

उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि की कामनाओं के साथ, मेरी प्रभु से प्रार्थना है कि आपके सभी शुभ संकल्प जल्द ही फलित हो जायें और आपके जीवन और संसार मे हर कंही आनन्द की वर्षा होती रहे। मंगल शुभकामनाएं 💐💐

Lord Shri Hanuman Ji

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