Category: प्रार्थना, परमात्मा और हम लोग

हिंदू नववर्ष संवत् 2083 एवं चैत्र नवरात्रि की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

हिंदू नववर्ष संवत् 2083 एवं चैत्र नवरात्रि की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। जगज्जननी कालका माई से आज यही प्रार्थना है कि इस बार नवरात्रि के ये नौ दिन हमें जड़ता से चैतन्य और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए और हमारे सभी… Continue Reading “हिंदू नववर्ष संवत् 2083 एवं चैत्र नवरात्रि की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।”

सबका भला सर्बत्त दा भला – अरदास करना ही सही मायने में उनकी प्रार्थना है।

ईश्वर ही इस सारी सृष्टि का परम सत्य है और इसका सार है। और यदि ईश्वर सबकी निजी अपेक्षाओं, इच्छाओं या धारणाओं के आधार पर इस सृष्टि को चलाना शुरू कर दें तो इस ब्रह्मांड का संतुलन और उसकी सहज व्यवस्था पल भर में… Continue Reading “सबका भला सर्बत्त दा भला – अरदास करना ही सही मायने में उनकी प्रार्थना है।”

अपने अंतस के राम को और महिषासुरमर्दिनी को एक साथ जागृत करने का पर्व है – दशहरा।

असुरत्व पर देवत्व के विजयपर्व दशहरा की बधाई और हार्दिक शुभकामनायें। दशहरा का यह प्रेरणा पर्व हमारे मन में छाई हुई निराशाओं के बीच आशा का संचार करता है। यह त्यौहार हमें संदेश देता है की सदा सदा से उजाला ही विजयी हुआ है… Continue Reading “अपने अंतस के राम को और महिषासुरमर्दिनी को एक साथ जागृत करने का पर्व है – दशहरा।”

गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

बुद्धिमत्ता, समृद्धि और सौभाग्य के प्रतीक प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी की आराधना के महापर्व गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं। शुभ कार्यों में सफलता का वरदान देने वाले भगवान गणेश इस बात का भी प्रतीक हैं की जिंदगी में खत्म होने जैसा कभी… Continue Reading “गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏”

आत्माराम

असल मे तो राम और आत्मा में फासला शुरू से ही नही है, पर हम इस बात को देर से समझते हैं या शायद समझते ही नही हैं। हम ही तो आत्माराम हैं जिसमे दोनों हैं। आप और परमात्मा कभी भी अलग नहीं थे,… Continue Reading “आत्माराम”

मन के अनुकूल हो तो हरि कृपा और मन के विपरीत हो तो हरि इच्छा।

ये सत्य हम सब जानते हैं कि जो इस ब्रह्मांड के रचियता हैं उन्होंने ही हमे भी रचा है। ये जो आवागमन का खेल चल रहा है, जिसे आप अपना खेला समझ रहे हैं उसे खेलने वाला कोई और ही है। उनका ये खेल… Continue Reading “मन के अनुकूल हो तो हरि कृपा और मन के विपरीत हो तो हरि इच्छा।”

प्रार्थना

वे सब रावण ही तो हैं जो कई कई चेहरे ले कर और अपने झूठ को गर्व से माथों पर सजाए घूम रहे हैं। हम सबने सुना है कि रावण के दस सिर थे। मगर लोग तो जाने कितने चेहरे लिये घूम रहे हैं… Continue Reading “प्रार्थना”

प्रार्थना

केवल अप्राप्त को प्राप्त करना ही नही, बल्कि जो मिला है, प्राप्त है, मौजूद है या फिर जो भी जीवन यात्रा में प्राप्त होता जाये, मिलता जाये – उसके साथ और उसका उत्सव मनाना, नृत्य करना, गीत गाना और धन्यवाद देना ही बस जीवन… Continue Reading “प्रार्थना”

ईश्वर जो सदा से प्रकट हैं, जो सब जगह मौजूद हैं। क्या आप उन्हें पहचानते हैं?

ईश्वर तो सदा से प्रकट हैं, सब जगह मौजूद हैं। जो पहले से प्रकट है वो और अधिक क्या प्रकट होंगे। हाँ, ये हो सकता है कि अभी आप उन्हें पहचानते नहीं हो। जिस किसी को भी आपके भीतर सम्भावनायें, अच्छाई दिखाई दे रही… Continue Reading “ईश्वर जो सदा से प्रकट हैं, जो सब जगह मौजूद हैं। क्या आप उन्हें पहचानते हैं?”

प्रार्थना

मेरे विचार में परमात्मा का एक अर्थ है हमारे अपने अस्तित्व की ऊर्जा, हमारा आनन्द, प्रेम एवं आंतरिक सौंदर्य, शक्ति, कौशल तथा हमारा बुद्धत्व, जो हम सब में समाहित है। जिसे हम बहकने की वजह से, मूर्खता, अहंकार या शायद उलझनों के कारण जान… Continue Reading “प्रार्थना”