Category: प्रार्थना, परमात्मा और हम लोग

रविवारीय प्रार्थना – जो पता है कि ग़लत – अनुचित है—उसे कहना और करना बंद कर श्रेष्ठ की ओर बढ़ना तथा जहाँ हैं, जिनके साथ हैं उन्हीं में अपने प्रभु को देखना – यही प्रार्थना है।

आज आपको एक मज़ेदार बात बताता हूँ—न तो आप ईश्वर हुए जा रहे हैं और न ही आपको उनका कोई अनुभव हो रहा है। बुरा मत मानिएगा लेकिन ये जो जन्म-जन्मांतर की प्रक्रिया, अंतहीन यात्रा और खोज है, वह इस बार भी ख़त्म होने… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – जो पता है कि ग़लत – अनुचित है—उसे कहना और करना बंद कर श्रेष्ठ की ओर बढ़ना तथा जहाँ हैं, जिनके साथ हैं उन्हीं में अपने प्रभु को देखना – यही प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – वो सब करना जिससे कि आपको वह सब श्रेष्ठ मिल सके जिसके आप हक़दार हैं और बेहतर होने का कोई भी मौका हाथ से न निकलने पाए।

आज इस रविवारीय लेख में मैं किसी जटिल मंत्र, वेद पुराणों में लिखी विधियों, दिनचर्या, बंधनों या किसी अदृश्य ‘हायर सेल्फ़’ की भारी-भरकम बातें नहीं करूँगा। आज इस बात की पड़ताल करेंगे कि आपको वास्तव में अच्छा कैसे महसूस होता है? आप भीतर से… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – वो सब करना जिससे कि आपको वह सब श्रेष्ठ मिल सके जिसके आप हक़दार हैं और बेहतर होने का कोई भी मौका हाथ से न निकलने पाए।”

कृष्ण जन्माष्टमी

रविवारीय प्रार्थना – ये याद रखना कि कोई भी इंसान इस दुनिया में कभी खाली हाथ नहीं आता, वह अपने प्रारब्ध के साथ आता है और अपने कर्मों की विरासत छोड़कर जाता है प्रार्थना है।

मैं आज एक बात स्पष्ट कर दूं कि ज्यादातर रविवारीय लेख केवल आपके लिए नहीं होते हैं; ये तो बस मेरी एक छोटी सी कोशिश होती है, अपने जीवन, परमात्मा और अध्यात्म को अपनी समझ से समझने की। और हाँ, ये उन आने वाली… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – ये याद रखना कि कोई भी इंसान इस दुनिया में कभी खाली हाथ नहीं आता, वह अपने प्रारब्ध के साथ आता है और अपने कर्मों की विरासत छोड़कर जाता है प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – क्या आपका अस्तित्व और चेतना वास्तव में स्वतंत्र है या पुरानी धारणाओं, कुरीतियों, आदतों और संकीर्ण प्रवृत्तियों नें आज भी उसे गुलाम बना रखा है।

आज का ये रविवारीय लेख उन साधकों को समर्पित है, जो जीवन के गहरे रहस्यों को भेदकर सच्ची आध्यात्मिक स्वाधीनता पाना चाहते हैं, तथा आनंद, परम शांति और मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होने की अभिलाषा रखते हैं। कल हमने पूरे गौरव के साथ… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – क्या आपका अस्तित्व और चेतना वास्तव में स्वतंत्र है या पुरानी धारणाओं, कुरीतियों, आदतों और संकीर्ण प्रवृत्तियों नें आज भी उसे गुलाम बना रखा है।”

रविवारीय प्रार्थना: अपने मन और वृत्तियों को पूर्ण नियंत्रण में रखते हुए, नैतिक कर्तव्यबोध से सराबोर रहना; तथा आत्मोन्नति, चित्तशुद्धि और ब्रह्मानुभूति के मार्ग पर अविराम अग्रसर रहना।

आज रविवारीय चिंतन में एक विस्मयकारी बात बताता हूं – हम सब स्वयं से परे जाना चाहते हैं, अपने ‘मैं’, अपने छोटे-मोटे स्वार्थ, डर, अज्ञान और आराम के दायरे से बाहर निकलकर किसी महान उद्देश्य या परम सत्य से जुड़ना चाहते हैं, मौजूदा स्थिति,… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना: अपने मन और वृत्तियों को पूर्ण नियंत्रण में रखते हुए, नैतिक कर्तव्यबोध से सराबोर रहना; तथा आत्मोन्नति, चित्तशुद्धि और ब्रह्मानुभूति के मार्ग पर अविराम अग्रसर रहना।”

रविवारीय प्रार्थना – दिखावे की भक्ति और बिखरते विश्वास के इस दौर में श्री रामायण – गीता के सत्य को हमारे विचारों, शब्दों और कर्मों का असल में मार्गदर्शक-दर्पण बनाना प्रार्थना है।

हममें से अधिकांश लोग अपनी पूरी ज़िंदगी ईश्वर से सिर्फ एक ही गुहार लगाने में बिता देते हैं—”हे ईश्वर! मेरे हालात बदल दो, मेरा भाग्य बदल दो, मुझे यह दिला दो या वह बना दो।” लेकिन मुझे लगता  है कि शायद, ईश्वर मौन रहकर… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – दिखावे की भक्ति और बिखरते विश्वास के इस दौर में श्री रामायण – गीता के सत्य को हमारे विचारों, शब्दों और कर्मों का असल में मार्गदर्शक-दर्पण बनाना प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – ‘कुछ होने’ और ‘कुछ पाने’ की इस अंतहीन ‘हाय-हाय’ को समाप्त कर, अपने अशांत चित्त को शांत करना और ‘सुकून, संतोष और शून्यता’ की ओर मुड़ जाना ही प्रार्थना है।

अगर आज मैं आपको बिल्कुल साफ़ शब्दों में बताऊँ—कि दुनिया क्या सोचती है और आपके आस-पास के लोग क्या कहते हैं, अगर उस शोर को एक पल के लिए छोड़ दिया जा—तो वास्तविक आध्यात्मिकता संसार में कुछ भी बटोरने या पा लेने की दौड़… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – ‘कुछ होने’ और ‘कुछ पाने’ की इस अंतहीन ‘हाय-हाय’ को समाप्त कर, अपने अशांत चित्त को शांत करना और ‘सुकून, संतोष और शून्यता’ की ओर मुड़ जाना ही प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – अपने ब्रह्म स्वरूप को अपने रोजमर्रा के कार्यों में, बातचीत और आचरण में आगे रखना न कि अपने आदिम, शिकारी और बेचैन हिस्से को।

आज के जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह नहीं है कि हममें ज्ञान की कमी है। हमारी असली समस्या अज्ञानता नहीं, बल्कि क्रियान्वयन (execution) की है। ऐसा शायद ही कभी होता है जब हमें यह न पता हो कि सही क्या है; असली चुनौती… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – अपने ब्रह्म स्वरूप को अपने रोजमर्रा के कार्यों में, बातचीत और आचरण में आगे रखना न कि अपने आदिम, शिकारी और बेचैन हिस्से को।”

रविवारीय प्रार्थना: जब छल-कपट, क्षुद्रता और अनैतिकता दुनियादारी का हिस्सा बन चुकी हों, तब अपने आचरण की पवित्रता को बनाए रखना और सनातन सिद्धांतों पर अडिग रहना ही सच्ची प्रार्थना है।

हर सुबह जब हम आँखें खोलते हैं, तो सफलता की एक बंधी-बंधाई परिभाषा हमारे सामने आ खड़ी होती है — एक खुशहाल परिवार, समाज में रुतबा, करियर की नई ऊंचाई, अच्छा स्वास्थ्य और चारों तरफ वाहवाही। बेशक, ये सभी जीवन के अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना: जब छल-कपट, क्षुद्रता और अनैतिकता दुनियादारी का हिस्सा बन चुकी हों, तब अपने आचरण की पवित्रता को बनाए रखना और सनातन सिद्धांतों पर अडिग रहना ही सच्ची प्रार्थना है।”