Category: Spiritual

रविवारीय प्रार्थना – ‘कुछ होने’ और ‘कुछ पाने’ की इस अंतहीन ‘हाय-हाय’ को समाप्त कर, अपने अशांत चित्त को शांत करना और ‘सुकून, संतोष और शून्यता’ की ओर मुड़ जाना ही प्रार्थना है।

अगर आज मैं आपको बिल्कुल साफ़ शब्दों में बताऊँ—कि दुनिया क्या सोचती है और आपके आस-पास के लोग क्या कहते हैं, अगर उस शोर को एक पल के लिए छोड़ दिया जा—तो वास्तविक आध्यात्मिकता संसार में कुछ भी बटोरने या पा लेने की दौड़… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – ‘कुछ होने’ और ‘कुछ पाने’ की इस अंतहीन ‘हाय-हाय’ को समाप्त कर, अपने अशांत चित्त को शांत करना और ‘सुकून, संतोष और शून्यता’ की ओर मुड़ जाना ही प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – अपने ब्रह्म स्वरूप को अपने रोजमर्रा के कार्यों में, बातचीत और आचरण में आगे रखना न कि अपने आदिम, शिकारी और बेचैन हिस्से को।

आज के जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह नहीं है कि हममें ज्ञान की कमी है। हमारी असली समस्या अज्ञानता नहीं, बल्कि क्रियान्वयन (execution) की है। ऐसा शायद ही कभी होता है जब हमें यह न पता हो कि सही क्या है; असली चुनौती… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – अपने ब्रह्म स्वरूप को अपने रोजमर्रा के कार्यों में, बातचीत और आचरण में आगे रखना न कि अपने आदिम, शिकारी और बेचैन हिस्से को।”

रविवारीय प्रार्थना: जब छल-कपट, क्षुद्रता और अनैतिकता दुनियादारी का हिस्सा बन चुकी हों, तब अपने आचरण की पवित्रता को बनाए रखना और सनातन सिद्धांतों पर अडिग रहना ही सच्ची प्रार्थना है।

हर सुबह जब हम आँखें खोलते हैं, तो सफलता की एक बंधी-बंधाई परिभाषा हमारे सामने आ खड़ी होती है — एक खुशहाल परिवार, समाज में रुतबा, करियर की नई ऊंचाई, अच्छा स्वास्थ्य और चारों तरफ वाहवाही। बेशक, ये सभी जीवन के अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना: जब छल-कपट, क्षुद्रता और अनैतिकता दुनियादारी का हिस्सा बन चुकी हों, तब अपने आचरण की पवित्रता को बनाए रखना और सनातन सिद्धांतों पर अडिग रहना ही सच्ची प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – बिना सोचे-विचारे अपने स्तर से नीचे गिर कर बेहोशी में कुछ भी कहने या कर गुजरने से बचना, ज्यादातर होश में रहना तथा अपने मूल दिव्य भाव में स्थिर रहना ही प्रार्थना है।

आज फिर रविवार है, चिंतन-मनन करने का दिन, थोड़ा ठहरकर अंतर्मन में झांकने का दिन। आज मैं आपके साथ जो विचार साझा कर रहा हूँ, वह न तो बहुत जटिल है और न ही इसे करने में कोई बड़ा प्रयास चाहिए। आज मैं आपसे… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – बिना सोचे-विचारे अपने स्तर से नीचे गिर कर बेहोशी में कुछ भी कहने या कर गुजरने से बचना, ज्यादातर होश में रहना तथा अपने मूल दिव्य भाव में स्थिर रहना ही प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – आप पैदायशी दुष्ट या रूखे या मूर्ख या उदासीन इंसान नहीं है, बस आपके भीतर धूल जम गई है, कूड़ा करकट का पहाड़ और पूर्वाग्रहों की दीवारें बन गई है, उन्हें मिटाने और हटाने का प्रयास ही प्रार्थना है।

मुझे आपका तो पता नहीं, लेकिन इस संसार में ज्यादातर लोग खुद को सुधारने, श्रेष्ठ बनने, उस परम ईश्वरीय अनुभूति को और जीवन की समस्त श्रेष्ठ संभावनाओं को साकार करने की कोशिश में लगे हैं। आप अपना समय और ऊर्जा किस चीज़ में लगा… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – आप पैदायशी दुष्ट या रूखे या मूर्ख या उदासीन इंसान नहीं है, बस आपके भीतर धूल जम गई है, कूड़ा करकट का पहाड़ और पूर्वाग्रहों की दीवारें बन गई है, उन्हें मिटाने और हटाने का प्रयास ही प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – परमात्मा से कुछ भी नहीं छुपा है न तो आपके कर्म और न ही उसके पीछे की वजह या नीयत। इस सत्य के प्रति निरंतर सावधान रहना ही प्रार्थना है।

रविवार की इस शांत और खूबसूरत सुबह, चलिए आज फिर चिंतन करते हैं – सब कुछ करने के बाद, हर भटकाव के बाद, हर नाटकबाजी के बाद, झूठ सच के बाद, सत्य को समझने और वापस अपने ही भीतर मौजूद उस ईश्वर के पास… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – परमात्मा से कुछ भी नहीं छुपा है न तो आपके कर्म और न ही उसके पीछे की वजह या नीयत। इस सत्य के प्रति निरंतर सावधान रहना ही प्रार्थना है।”

रविवारीय प्रार्थना – स्वय को श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ की और बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत रखना।

आज फिर रविवार है—एक ऐसा दिन जो किसी पुरानी गाँठ को खोलने, किसी नए सत्य को आत्मसात करने और स्वयं को जगाने के लिए मिला है। यह समय है अपनी ‘ग्रहणशीलता’ को परखने का और ईश्वर की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए अपनी… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – स्वय को श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ की और बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत रखना।”

रविवारीय प्रार्थना: “मैं कैसा दिख रहा हूँ?” इसकी चिंता करने के बजाय, इस बात का चिंतन करना कि “प्रभु को मेरे भीतर क्या दिख रहा होगा?”

ज्यादातर लोगों ने अपने जीवन को एक सजी-धजी सोशल मीडिया टाइमलाइन में तब्दील कर दिया है—जहाँ हर साँस केवल दूसरों को प्रभावित करने के लिए है और हर कार्य एक ‘लाइक’ बटोरने का विज्ञापन। हमने ‘दिखने’ की कला में इतनी महारत हासिल कर ली… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना: “मैं कैसा दिख रहा हूँ?” इसकी चिंता करने के बजाय, इस बात का चिंतन करना कि “प्रभु को मेरे भीतर क्या दिख रहा होगा?””

रविवारीय प्रार्थना – पशु, पक्षी, पौधे और करोड़ों वर्षों के संघर्षों को पार कर मिले इस बार के मनुष्य जीवन को यूंही नहीं गंवाना।

कहाँ है ईश्वर? ज्ञान, आध्यात्म या धर्म असल में क्या हैं हम साधारण लोगों के लिए? ये प्रश्न सदियों से हमारे भीतर उठते रहे हैं—और अक्सर अनुत्तरित ही रह जाते हैं। हर रविवार मैं भी आपकी तरह इन्हीं पेचीदा सवालों के धागे सुलझाने की… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – पशु, पक्षी, पौधे और करोड़ों वर्षों के संघर्षों को पार कर मिले इस बार के मनुष्य जीवन को यूंही नहीं गंवाना।”

रविवारीय प्रार्थना – अपनी भूलों और गलतियों के प्रति जागरूक रहना, अपने भीतर को परिष्कृत और अपने ‘मैं’ को खत्म करने का निरंतर प्रयास करना तथा उनका नामजप करना।

रविवार की शांत सुबह मेरे लिये आत्म-चिंतन का निमंत्रण  होती है। यह वह समय है जब मैं उन अनुभूतियों को – बातों को समझने और शब्द देने की कोशिश करता हूँ, जो किसी अदृश्य ऊर्जा, पितरों, गुरु-सत्ता या उस ‘बोधिसत्व चेतना’ की प्रेरणा से… Continue Reading “रविवारीय प्रार्थना – अपनी भूलों और गलतियों के प्रति जागरूक रहना, अपने भीतर को परिष्कृत और अपने ‘मैं’ को खत्म करने का निरंतर प्रयास करना तथा उनका नामजप करना।”